Category:
Stock Market (शेयर बाजार)
State:
Uttarakhand
2026-09-12 03:30:53
जयपुर। भारतीयों के विदेश से जुड़े वित्तीय व्यवहार में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी शेयर और प्रॉपर्टी में भारतीयों का निवेश पिछले दो वर्षों में करीब 37 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाली रकम में लगभग 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
विदेशी निवेश का बढ़ता आकर्षण, शिक्षा पर खर्च में कमी—भारतीयों की बदलती विदेश नीति की तस्वीर
जयपुर। भारतीयों के विदेश से जुड़े वित्तीय व्यवहार में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी शेयर और प्रॉपर्टी में भारतीयों का निवेश पिछले दो वर्षों में करीब 37 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाली रकम में लगभग 40 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
निवेश के लिए विदेश का रुख बढ़ा
बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल के बीच भारतीय निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में विदेशी संपत्तियों को भी जगह दे रहे हैं। विदेशी शेयर बाजार, रियल एस्टेट और अन्य परिसंपत्तियों में निवेश को लेकर रुचि बढ़ी है। अमेरिका भारतीय निवेशकों के लिए प्रमुख पसंद बना हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक बाजारों में विविधीकरण और संपत्ति निर्माण इसकी बड़ी वजहों में शामिल हैं।
विदेशी शिक्षा पर खर्च घटने के पीछे कई कारण
दूसरी ओर, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भेजी जाने वाली रकम में कमी का रुझान सामने आया है। रिपोर्ट में इसके पीछे विदेशी विश्वविद्यालयों की बढ़ती फीस, रहने का खर्च, वीजा एवं अन्य लागत तथा शिक्षा के बाद रोजगार से जुड़ी अनिश्चितताओं को प्रमुख कारणों में गिना गया है।
विदेश में पढ़ाई का कुल खर्च लगातार बढ़ने के कारण कई परिवार अब देश में ही उच्च शिक्षा के विकल्प तलाश रहे हैं। वहीं कुछ विद्यार्थी कम लागत वाले देशों और वैकल्पिक पाठ्यक्रमों की ओर भी रुख कर रहे हैं।
निवेश और शिक्षा की प्राथमिकताओं में आया बदलाव
जानकारों का मानना है कि आंकड़े भारतीय परिवारों की प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत देते हैं। जहां पहले विदेश जाना मुख्य रूप से शिक्षा और रोजगार से जुड़ा निर्णय माना जाता था, वहीं अब विदेशी बाजारों में निवेश और संपत्ति निर्माण भी भारतीयों की आर्थिक रणनीति का हिस्सा बनता जा रहा है।
हालांकि, विदेशी निवेश में तेजी के साथ मुद्रा विनिमय जोखिम, विदेशी बाजारों की अस्थिरता, कर नियम और संबंधित देश के कानून को समझना भी जरूरी है। केवल रिटर्न देखकर निवेश करने के बजाय जोखिम और नियामकीय पहलुओं का आकलन आवश्यक है। भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में भी 2026 में पूंजी प्रवाह मजबूत रहने की रिपोर्ट सामने आई है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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