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Category: Politics (राजनीति)    State: Rajasthan

2026-09-13 06:09:58

जयपुर। राजस्थान में दो चरणों में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव के बाद अब सभी की नजरें 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर जीत-हार का गणित लगाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों में बहुमत को लेकर भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।

राजस्थान नगर निकाय चुनाव: कल आएगा फैसला, 21 सितंबर को तय होगी चेयरमैन की कुर्सी

चुनावी रुझानों ने बढ़ाई सियासी हलचल, भाजपा-कांग्रेस के साथ निर्दलीय भी निर्णायक भूमिका में

जयपुर। राजस्थान में दो चरणों में संपन्न हुए नगर निकाय चुनाव के बाद अब सभी की नजरें 14 सितंबर को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। मतदान प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर जीत-हार का गणित लगाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के विभिन्न नगर निकायों में बहुमत को लेकर भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है।

सरकार के साथ निकाय बोर्ड बनाने की चुनौती

चुनावी चर्चा में सामने आ रहे स्थानीय समीकरणों के अनुसार कई नगर परिषदों में मुकाबला बेहद करीबी रहने की संभावना है। भाजपा जहां सत्ता में होने का लाभ उठाकर अधिक से अधिक नगर निकायों में बोर्ड बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस भी अपने मजबूत क्षेत्रों में वापसी की उम्मीद लगाए हुए है। कई स्थानों पर निर्दलीय प्रत्याशी भी परिणाम के बाद किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं।

निर्वाचन से पहले ही 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। इनमें भाजपा के 44, कांग्रेस के 16 और 17 निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं।

जयपुर समेत बड़े शहरों पर विशेष नजर

राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के प्रमुख नगर निगमों और नगर परिषदों के परिणाम राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जयपुर में इस बार 63.55 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जिससे राजनीतिक दलों के समीकरण और अधिक रोचक हो गए हैं। मतदान के बाद निर्दलीय पार्षदों की संभावित भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है।

अब नजर बोर्ड गठन पर

नगर निकायों के पार्षदों के परिणाम सामने आने के बाद अगली बड़ी चुनौती बोर्ड गठन की होगी। उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम के अनुसार महापौर और सभापति के चुनाव 21 सितंबर तथा उपमहापौर और उपसभापति के चुनाव 22 सितंबर को निर्धारित हैं। ऐसे में 14 सितंबर के परिणामों के बाद राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

राजनीतिक दलों के लिए केवल पार्षदों की संख्या जीतना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक बहुमत जुटाना भी बड़ी चुनौती रहेगा। जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा, वहां निर्दलीय और छोटे दलों के निर्वाचित पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

संवाददाता — श्रवण पंवार
जयपुर | NMS.NEWS
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