Category:
Politics (राजनीति)
State:
Delhi
2026-11-02 04:07:03
राहुल पर अमित शाह का तीखा हमला—‘नकली संसद में ही बने रहिए’; नितिन नवीन ने भी विपक्ष को घेरा
राहुल पर अमित शाह का तीखा हमला—‘नकली संसद में ही बने रहिए’; नितिन नवीन ने भी विपक्ष को घेरा
रामलीला मैदान की रैली के बाद भाजपा का जवाबी हमला, 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर आयोजन को लेकर उठाए सवाल; संबित पात्रा ने 28 हजार कुर्सियों में 5 से 7 हजार खाली रहने का किया दावा
नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित विपक्षी INDIA गठबंधन की रैली के बाद देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। कथित चुनावी अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में आयोजित इस रैली को लेकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ में राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि उन्हें प्रधानमंत्री बनना है तो वे जिंदगीभर नकली संसद में बैठे रहें, उनका प्रधानमंत्री बनने का नंबर कभी नहीं आएगा।
भाजपा नेताओं ने रैली की तारीख, विपक्ष के प्रदर्शन, भीड़ की संख्या और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों को लेकर कई सवाल उठाए। वहीं विपक्षी दलों ने रैली के माध्यम से मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा उठाया था।
अमित शाह बोले—1984 के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा आयोजन
चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी के दिन दिल्ली में रैली आयोजित करना पीड़ित परिवारों की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस तारीख के महत्व को नजरअंदाज किया।
शाह ने 1984 की हिंसा का उल्लेख करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस चर्चित बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। शाह ने कहा कि उस घटना के पीड़ित परिवारों के जख्म आज भी गहरे हैं और ऐसे दिन राजनीतिक आयोजन करना उचित नहीं था।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि सोनिया गांधी का अपने बेटे को प्रधानमंत्री बनाने का सपना पूरा नहीं हुआ है और अब विपक्ष ने नकली संसद का नया तरीका अपनाया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो पूरी जिंदगी नकली संसद में बैठे रहें, उनका नंबर कभी नहीं आएगा।
नितिन नवीन का आरोप—विदेशी ताकतों के इशारे पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश
हरियाणा के रोहतक में भाजपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा।
नवीन ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों के इशारे पर देश में अस्थिरता और अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का जनादेश सर्वोपरि होता है और चुनाव में हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे राजनीतिक रवैये का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन राज्यों में पार्टी जीतती है, वहां लोकतंत्र की जीत बताती है, जबकि हार मिलने पर लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है। नवीन ने यह भी कहा कि देश संविधान के अनुसार चलेगा, किसी परिवार की इच्छा के अनुसार नहीं।
अपने संबोधन में उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से पीड़ित परिवारों के प्रति जवाबदेही और माफी की बात भी उठाई। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर विश्वास जताते हुए कहा कि मोदी कहीं नहीं जाने वाले और 2029 में भी लाल किले पर दिखाई देंगे।
28 हजार कुर्सियों में 5 से 7 हजार खाली होने का दावा
रैली के बाद भाजपा सांसद एवं प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष के भीड़ संबंधी दावों पर सवाल उठाए। पात्रा ने दावा किया कि कांग्रेस नेताओं ने रैली में करीब 10 लाख लोगों के पहुंचने की बात कही थी, लेकिन रामलीला मैदान में लगाए गए 28 हजार कुर्सियों में से लगभग 5 से 7 हजार कुर्सियां दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच खाली थीं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मैदान का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा खाली दिखाई दे रहा था। पात्रा ने रैली के वीडियो और तस्वीरों का हवाला देते हुए विपक्ष के भीड़ संबंधी दावों को चुनौती दी। उन्होंने आयोजन को समय की बर्बादी बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक प्रदर्शन करने का आरोप लगाया।
हालांकि, भीड़ की वास्तविक संख्या को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। भाजपा की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित आधिकारिक संख्या नहीं माना जा सकता।
विपक्ष ने SIR और चुनावी पारदर्शिता को बनाया रैली का मुद्दा
दूसरी ओर, INDIA गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली के दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित चुनावी अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। विपक्ष का कहना है कि योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
भाजपा ने इन आरोपों को राजनीतिक हताशा से प्रेरित बताते हुए विपक्ष से अपने दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण और कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात कही।
राजनीतिक टकराव के बीच 1984 की बरसी भी बनी बहस का विषय
इस पूरे घटनाक्रम में 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर रैली आयोजित किए जाने का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। भाजपा ने आयोजन की तारीख को लेकर कांग्रेस की आलोचना की, जबकि विपक्ष ने अपने कार्यक्रम को चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जुड़ा आंदोलन बताया।
दिल्ली की रैली के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अब देखना होगा कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग की ओर से क्या स्पष्टीकरण आता है और विपक्ष अपनी मांगों को आगे किस रणनीति के तहत उठाता है।
संवाददाता: श्रवण पंवार, जयपुर
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