Category:
Government (सरकार)
State:
Rajasthan
2026-08-23 03:31:22
एनएमसी निरीक्षण में सामने आई हकीकत: पुराने मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति से नए कॉलेजों की व्यवस्था संभालने पर सवाल
🏥 राजस्थान में 22 नए मेडिकल कॉलेज, लेकिन डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती
एनएमसी निरीक्षण में सामने आई हकीकत: पुराने मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति से नए कॉलेजों की व्यवस्था संभालने पर सवाल
उदयपुर/जयपुर। राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के लिए सरकार ने बड़ी संख्या में नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए हैं, लेकिन इन संस्थानों में पर्याप्त फैकल्टी और चिकित्सकों की उपलब्धता अब भी चुनौती बनी हुई है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 22 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं, मगर कई कॉलेजों में स्वीकृत पदों के मुकाबले शिक्षकों की उपस्थिति काफी कम पाई गई।
एनएमसी के निरीक्षण के दौरान सामने आए आंकड़ों के मुताबिक डूंगरपुर में 277 स्वीकृत शिक्षकों में केवल 123, बांसवाड़ा में 265 में 125, झालावाड़ में 287 में 148 और पाली में 307 में 142 शिक्षक ही उपस्थित मिले। कई अन्य नए मेडिकल कॉलेजों में भी यही स्थिति सामने आई।
पुराने कॉलेजों से डॉक्टर भेजकर चल रही व्यवस्था
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि नए मेडिकल कॉलेजों में व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुराने और बड़े मेडिकल कॉलेजों से डॉक्टरों व शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है। इससे पुराने संस्थानों में भी फैकल्टी की कमी का दबाव बढ़ सकता है और चिकित्सा शिक्षा तथा मरीजों के उपचार की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
75% फैकल्टी उपस्थिति का नियम
नेशनल मेडिकल कमीशन के मानकों के अनुसार मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों और रेजिडेंट डॉक्टरों की पर्याप्त उपस्थिति आवश्यक है। निरीक्षण में कई संस्थानों में निर्धारित स्तर से कम उपस्थिति सामने आने से मान्यता और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
नए कॉलेजों का उद्देश्य तभी सफल होगा जब डॉक्टर भी पर्याप्त हों
सरकार द्वारा नए मेडिकल कॉलेज खोलना निश्चित रूप से चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन केवल भवन और सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। स्थायी विशेषज्ञ डॉक्टर, पर्याप्त फैकल्टी, रेजिडेंट चिकित्सक और बेहतर अस्पताल सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी लगातार बनी रही तो इसका सीधा असर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई, क्लिनिकल ट्रेनिंग और मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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