Category:
Politics (राजनीति)
State:
Rajasthan
2026-09-03 03:30:59
राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर टिकट वितरण के बाद भाजपा अब संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की तैयारी में है। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों और संभावित बागियों को साधने के साथ पार्टी का अगला फोकस बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय और मजबूत करने पर है।
बागावत के बाद अब बूथ तक फोकस: भाजपा में ‘डैमेज कंट्रोल’ के साथ जमीनी मैनेजमेंट की तैयारी
जयपुर | 3 सितंबर 2026
राजस्थान में आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर टिकट वितरण के बाद भाजपा अब संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की तैयारी में है। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों और संभावित बागियों को साधने के साथ पार्टी का अगला फोकस बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय और मजबूत करने पर है।
4 सितंबर को जयपुर पहुंचेंगे बीएल संतोष
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष 4 सितंबर को जयपुर पहुंचेंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश भाजपा मुख्यालय में दिनभर बैठकों का दौर चलेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ सहित संगठन के प्रमुख नेताओं के साथ चुनावी तैयारियों, बागियों से उपजे असंतोष और बूथ प्रबंधन पर चर्चा होने की संभावना है।
बागियों को मनाने से लेकर बूथ की मजबूती तक रणनीति
टिकट वितरण के बाद कई क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं और टिकट दावेदारों की नाराजगी सामने आई है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में संगठन की एकजुटता बनाए रखना है। पार्टी स्तर पर डैमेज कंट्रोल के लिए नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है।
अब रणनीति केवल टिकट वितरण तक सीमित नहीं रहेगी। पार्टी वार्ड, मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, मतदाता संपर्क और चुनावी फीडबैक की समीक्षा पर जोर देगी। बीएल संतोष के दौरे को इसी संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जयपुर समेत कई क्षेत्रों में भीतरघात की चुनौती
निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद कुछ स्थानों पर विरोध और निर्दलीय मैदान में उतरने की स्थिति ने भाजपा की चिंता बढ़ाई है। जयपुर में भी टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं के विरोध की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि चुनाव प्रचार तेज होने से पहले नाराजगी को नियंत्रित कर संगठन को एकजुट किया जाए।
राजनीतिक संकेत साफ हैं—टिकट का विवाद पीछे छोड़ भाजपा अब ‘डैमेज कंट्रोल’ से आगे बढ़कर बूथ मैनेजमेंट और मतदाता संपर्क को जीत की मुख्य रणनीति बनाने में जुटी है।
संवाददाता — श्रवण पंवार, जयपुर
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